
नवरात्रि का सातवां दिन समर्पित है मां कालरात्रि को, जो देवी दुर्गा का अत्यंत शक्तिशाली और उग्र रूप हैं।
इनके रूप का नाम सुनते ही दुष्टों के छक्के छूट जाते हैं। उनका काला स्वरूप, बिखरे बाल, चार भुजाएं, और सवारी गधा — ये सब मिलकर डर नहीं, बल्कि नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का प्रतीक बन जाते हैं।
मां कालरात्रि पूजा शुभ मुहूर्त (29 सितंबर 2025)
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:37 AM – 05:25 AM |
| प्रातः सन्ध्या | 05:01 AM – 06:13 AM |
| अभिजित मुहूर्त | 11:47 AM – 12:35 PM |
| विजय मुहूर्त | 02:11 PM – 02:58 PM |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:09 PM – 06:33 PM |
| सायाह्न सन्ध्या | 06:09 PM – 07:22 PM |
| अमृत काल | 11:15 PM – 01:01 AM (30 सितंबर) |
| निशिता काल | 11:47 PM – 12:36 AM (30 सितंबर) |
मां कालरात्रि पूजा विधि (Maa Kaalratri Puja Vidhi)
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प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
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पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और चौकी पर देवी की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।
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देवी को कुमकुम, अक्षत, रोली, धूप, दीप, पुष्प अर्पित करें।
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मां को गुड़-चना और शहद का भोग लगाएं।
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गुड़हल के फूल अर्पित करें — यह देवी को अत्यंत प्रिय है।
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मंत्र जाप करें, स्तुति पढ़ें, आरती करें और अंत में प्रार्थना करें।
मां कालरात्रि मंत्र:
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
मां कालरात्रि प्रार्थना:
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
स्तुति (Stuti):
या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
मां कालरात्रि आरती (Aarti):
कालरात्रि जय जय महाकाली। काल के मुंह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतारा॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥
…
तू भी भक्त प्रेम से कह, कालरात्रि माँ तेरी जय॥
मां कालरात्रि को प्रिय भोग:
गुड़ और चना
शहद
गुड़हल के फूल
नीला रंग पहनना भी शुभ माना गया है।
क्यों करें मां कालरात्रि की पूजा?
भय, रोग, भयभीत करने वाली नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
घर में सुख, शांति और पॉजिटिव एनर्जी का संचार
तंत्र, मंत्र और रहस्यमयी साधनाओं के लिए यह दिन श्रेष्ठ माना गया है
सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मबल और आध्यात्मिक शक्ति को जाग्रत करने का माध्यम है।
भक्तिभाव से पूजा करें, सरल विधि अपनाएं और देवी से यह प्रार्थना करें कि जीवन में आने वाला हर संकट उनकी शक्ति के सामने तिनका बन जाए।

